प्रयागराज : कौड़िहार ब्लॉक के पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता रणधीर सिंह यादव हत्याकांड में पुलिस ने एक और आरोपी विजय पासी को गिरफ्तार कर नया खुलासा किया है। पुलिस पूछताछ में विजय ने हत्या के बाद शव की पहचान करने और स्कॉर्पियो छिपाने का राज उगला है। विजय के कबूलनामे के मुताबिक, शव की पहचान मिटाने के लिए 50 हजार रुपये में सौदा हुआ था।
बता दें, कौड़िहार ब्लॉक के पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता रणधीर सिंह यादव का शव पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के बमरौली स्टेशन के आउटर के पास ट्रैक पर मिला था। शव के 8 टुकड़े हुए थे। 72 घंटे बाद भी शव की पहचान न होने पर पुलिस ने अज्ञात शव मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, लेकिन राम सिंह के कबूलनामे के बाद फोटो और कपड़ों से शव की पहचान हो गई।
इस मामले में रणधीर की पत्नी जिला पंचायत सदस्य बबली यादव की शिकायत के आधार पर पुलिस रणधीर के बेहद करीबी राम सिंह यादव और उदय यादव पर नजर रख रही थी। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन मिलने पर हत्या की साजिश में शामिल राम सिंह यादव और लीला यादव (उदय की सास) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। राम सिंह ने पूरी सच्चाई बता दी।
डीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत के अनुसार, आरोपी विजय पासी नीवा थाना धूमनगंज का रहने वाला है। उसकी जय सिंह यादव और रवि पासी से दोस्ती है। दोनों एक ही मोहल्ले में रहते हैं। उदय ने रवि के जरिए संपर्क किया था। बातचीत के दौरान उदय ने रवि, विजय और जय सिंह को 50 हजार देने का वादा किया और रणधीर के शव को ठिकाने लगाने और उसकी पहचान मिटाने का फैसला किया।
योजना के अनुसार, 22 अगस्त की शाम रणधीर सिंह, राम सिंह, उदय यादव, भाई विजय यादव, नौकर सुजीत श्रीवास्तव ने नवाबगंज बाजार स्थित एक ढाबे पर खाना खाया और शराब पी। सभी ने रणधीर को खूब शराब पिलाई। नशे में धुत होने के बाद रणधीर ने चित्रकूट जाने से इनकार कर दिया। इस पर आरोपियों ने रणधीर को जबरन स्कॉर्पियो में बैठाया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
साजिश के मुताबिक, अब शव को ठिकाने लगाने की बारी थी। रणधीर का चेहरा क्षत-विक्षत करने के बाद आरोपियों ने शव को पूरामुफ्ती के पास रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया। ट्रेन गुजरने और टुकड़ों में शव मिलने के बाद, आरोपियों ने स्कॉर्पियो को चित्रकूट में छोड़ दिया। राम सिंह के कबूलनामे के बाद, फोटो और कपड़ों से शव की पहचान हुई।

